प्रतिबिंब का भ्रम और सत्य की चोंच: एक आध्यात्मिक साक्षात्कार
आज के इस शोर-शराबे वाले समाज में, जहाँ हर कोई एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में है, वहाँ एक ‘धर्मात्मा’ व्यक्ति की स्थिति उस कांच की तरह हो जाती है जिसके सामने खड़ी दुनिया केवल अपना ही अक्स देखती है। हाल ही में हुई एक चर्चा ने जीवन के कुछ ऐसे ही अनछुए पहलुओं…







